आज सीधे संवाद, बूथ-जिले की रिपोर्ट एआईसीसी को सौंपेंगे

भोपाल। कांग्रेस अब संगठन को नए तरीके से मजबूत करने की रणनीति बना रही है। लगातार चुनावी हार के बाद पार्टी जिलास्तर तक अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटी है। गुरूवार को राहुल गांधी मप्र के सभी जिलाध्यक्षों से मुलाकात करेंगे। इस दौरान बूथ से लेकर जिले की रिपोर्ट एआईसीसी को देंगे। इस बैठक में जिलाध्यक्ष सीधे राहुल को ग्राउंड रिपोर्ट देंगे यानि संगठन की असल स्थिति से लेकर राजनीतिक समीकरणों तक, सबकुछ। लेकिन बड़ा सवाल ये है कि क्या हाईकमान का यह सीधा दखल प्रदेश के नेताओं की ताकत कम करेगा? या फिर यह कांग्रेस के नए संगठन मॉडल की शुरुआत है?
कांग्रेस सूत्रों के अनुसार राहुल गांधी कांग्रेस के संगठन को जिलास्तर से लेकर हाईकमान तक फिर से मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। इसके तहत, वे पहली बार सीधे जिलाध्यक्षों से संवाद कर रहे हैं। 27 मार्च से देशभर के अलग-अलग राज्यों से जिलाध्यक्षों को बुलाया गया था, ताकि पार्टी की ग्राउंड रिपोर्ट सीधे हाईकमान तक पहुंचे। अब, गुरूवार को मप्र कांग्रेस के जिलाध्यक्षों से मुलाकात होगी, जिसमें राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े भी मौजूद रहेंगे। उनकी योजना संगठन में पावर डिस्ट्रीब्यूशन को बैलेंस करने की भी है, ताकि जिलास्तर पर नेताओं को ज्यादा ताकत मिले, लेकिन हाईकमान की पकड़ भी बनी रहे। बूथ स्तर तक कांग्रेस को मजबूत करने के इस फॉर्मूले से राहुल प्रदेश नेतृत्व के असर को कम करते हुए संगठन की सीधी मॉनिटरिंग करना चाहते हैं। इससे गुटबाजी पर रोक लग सकती है, लेकिन प्रदेश के बड़े नेताओं की भूमिका कमजोर भी हो सकती है।
बूथ से लेकर पूरे जिले की रिपोर्ट लेकर जा रहे जिलाध्यक्ष
कांग्रेस सूत्रों ने बताया कि जिले में बूथ से लेकर सेक्टर, जोन कमेटी और ब्लॉक अध्यक्षों की जो सूची तैयार की गई है, साथ ही यहां की संपत्तियों से संबंधित सारी जानकारी भी एआईसीसी से मंगाई गई है। साल 2024 से लेकर अब तक हुए सभी कार्यक्रमों की रिपोर्ट दी जाएगी, जिसमें धरना-प्रदर्शन और बैठकों का विवरण भी शामिल होगा।
महासचिवों के बैठक में भी उठी थी बात
जिलाध्यक्षों से संवाद से पहले दिल्ली में कांग्रेस महासचिवों की बैठक हुई थी। इस बैठक में दो महासचिवों ने आपत्ति जताई कि अगर जिलाध्यक्षों को केंद्रीय चुनाव समिति की बैठकों में शामिल किया गया, तो इससे प्रदेश अध्यक्ष और विधायक दल के नेता की ताकत कम हो जाएगी। लेकिन राहुल गांधी ने इस आपत्ति को खारिज करते हुए साफ कहा कि अगर जिलाध्यक्ष थोड़ा ताकतवर हो जाएगा, तो इसमें कोई दिक्कत नहीं है। उनके इस बयान से साफ है कि वे संगठन में नीचे तक नेतृत्व को मजबूत करने और हाईकमान की सीधी पकड़ बनाए रखने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।
ग्राउंड लेवल पर कंट्रोल बनाने की कवायद
इस बैठक को कांग्रेस के ग्राउंड लेवल पर रिपोर्ट इक_ा करने और संगठन को मजबूत करने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। इससे यह पता चलेगा कि बूथ स्तर पर कांग्रेस किन समस्याओं से जूझ रही है और किस तरह से जनता का भरोसा वापस जीता जा सकता है। लेकिन इस बैठक का असर सिर्फ इतना नहीं होगा। राहुल गांधी का जिलाध्यक्षों से सीधा संवाद प्रदेश नेतृत्व की भूमिका को कमजोर कर सकता है। अब तक जिलाध्यक्षों की रिपोर्ट प्रदेश अध्यक्ष के जरिए हाईकमान तक पहुंचती थी, लेकिन इस बैठक के बाद राहुल गांधी सीधे जिलाध्यक्षों से फीडबैक लेंगे, जिससे प्रदेश नेतृत्व और मुख्यमंत्री की भूमिका प्रभावित हो सकती है।