लेक्चरर भर्ती को लेकर अभ्यर्थियों का विरोध, हाईकोर्ट में दायर हुई याचिका
जयपुर: राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) द्वारा आयोजित स्कूल लेक्चरर (भूगोल) भर्ती परीक्षा-2022 एक बार फिर कानूनी विवादों के घेरे में आ गई है। परीक्षा की अंतिम उत्तर कुंजी (फाइनल आंसर-की) में किए गए संशोधनों को लेकर असंतुष्ट अभ्यर्थियों ने राजस्थान उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। याचिकाकर्ताओं का गंभीर आरोप है कि आयोग ने पूर्व में जारी मॉडल उत्तर कुंजी में जिन उत्तरों को सही ठहराया था, उन्हें अंतिम परिणाम के समय बिना किसी स्पष्ट और न्यायसंगत कारण के बदल दिया। इस बदलाव के कारण कई मेधावी अभ्यर्थियों के प्राप्तांक घट गए और वे अंतिम चयन सूची से बाहर हो गए।
मॉडल आंसर-की और विशेषज्ञ रिपोर्ट पर अभ्यर्थियों ने उठाए सवाल
याचिकाकर्ता योगेंद्र यादव और उनके साथी अभ्यर्थियों का कहना है कि आयोग द्वारा 23 दिसंबर 2022 को मॉडल आंसर-की जारी कर आपत्तियां मांगी गई थीं। अभ्यर्थियों ने प्रामाणिक संदर्भ पुस्तकों और आधिकारिक दस्तावेजों के प्रमाण संलग्न कर प्रश्न संख्या 33 और 122 सहित कई अन्य उत्तरों पर अपनी आपत्तियां दर्ज कराई थीं। इसके बावजूद 29 जनवरी 2024 को जारी फाइनल आंसर-की में उत्तरों में व्यापक फेरबदल कर दिया गया। अभ्यर्थियों का तर्क है कि आयोग ने इन बदलावों के पीछे न तो कोई विस्तृत कारण स्पष्ट किया और न ही विषय विशेषज्ञों की रिपोर्ट को सार्वजनिक किया।
आरक्षित सूची में नाम होने के बावजूद अंतिम चयन से हुए वंचित
याचिका में दावा किया गया है कि 5 अक्टूबर 2023 को घोषित आरक्षित सूची में याचिकाकर्ताओं के अनुक्रमांक दर्ज थे और उनके अंक संबंधित वर्ग की अंतिम कटऑफ दर से अधिक थे। इसके बावजूद अंतिम चयन सूची जारी होने पर उन्हें स्थान नहीं मिला। अभ्यर्थियों का आरोप है कि अंतिम उत्तर कुंजी में अचानक किए गए बदलावों ने उनकी मेरिट सूची को सीधे तौर पर प्रभावित किया। भूगोल विषय के अनेक प्रश्न मानक पुस्तकों और स्वयं आयोग की प्रारंभिक कुंजी के अनुसार सही थे, जिन्हें बाद में बदल देने से संपूर्ण चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लग गया है।
पुनर्मूल्यांकन और संशोधित मेरिट सूची जारी करने की हाईकोर्ट से गुहार
आंदोलित अभ्यर्थियों ने उच्च न्यायालय से गुहार लगाई है कि विवादित प्रश्नों की अंतिम उत्तर कुंजी में तत्काल सुधार किया जाए और प्रामाणिक उत्तरों के आधार पर संपूर्ण उत्तर पुस्तिकाओं का पुनर्मूल्यांकन कराया जाए। इसके साथ ही उन्होंने संशोधित मेरिट सूची जारी कर पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल करने की मांग की है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि आयोग के स्तर पर हुई तकनीकी या मानवीय त्रुटियों की कीमत निष्ठापूर्वक तैयारी करने वाले प्रतियोगी छात्रों को अपने भविष्य से चुकाकर नहीं देनी चाहिए।
भविष्य की प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा न्यायिक निर्णय
अब इस संवेदनशील मामले में राजस्थान उच्च न्यायालय के आने वाले निर्णय पर हजारों अभ्यर्थियों की निगाहें टिकी हुई हैं। विधिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकरण में न्यायालय का रुख न केवल स्कूल लेक्चरर भर्ती परीक्षा के भविष्य को तय करेगा, बल्कि आगामी समय में आयोजित होने वाली अन्य सभी प्रतियोगी परीक्षाओं में उत्तर कुंजी की सत्यता, पारदर्शिता और आयोग की जवाबदेही तय करने के संदर्भ में भी एक दूरगामी और ऐतिहासिक मिसाल कायम करेगा।
