बांसवाड़ा| में स्थित रविंद्र ध्यान आश्रम के प्रमुख उत्तम स्वामी महाराज यौन शोषण के आरोपों को लेकर मीडिया रिपोर्ट्स में घिरे हुए हैं। इन आरोपों के सार्वजनिक होने के बाद आश्रम परिसर में सन्नाटा पसरा हुआ है। सामान्य दिनों में जहां श्रद्धालुओं और भक्तों की आवाजाही बनी रहती थी, वहीं पिछले तीन दिनों से आश्रम में किसी प्रकार की चहल-पहल नजर नहीं आ रही है। हालांकि बाबा के अनुयायियों ने उन पर लगे आरोपों का खंडन किया है।उदयपुर मार्ग पर जानामेड़ी गांव में स्थित इस आश्रम के बारे में बताया जाता है कि बांसवाड़ा में उनके हजारों अनुयायी हैं। इसके बावजूद वर्तमान स्थिति में कोई भी व्यक्ति इन आरोपों पर खुलकर बोलने को तैयार नहीं है। आश्रम से जुड़े एक व्यक्ति ने नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर बताया कि उन्हें इस मामले में किसी भी मीडियाकर्मी से बातचीत न करने के निर्देश दिए गए हैं।
 
महिला द्वारा ई-मेल के माध्यम से लगाए गए आरोप

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, राजस्थान की एक महिला ने पंच अग्नि अखाड़े के महामंडलेश्वर ईश्वरानंद महाराज, जिन्हें उत्तम स्वामी के नाम से जाना जाता है, पर यौन शोषण के आरोप लगाए हैं। महिला ने दिल्ली के पुलिस आयुक्त को ई-मेल भेजकर स्वयं की सुरक्षा की मांग की है।रिपोर्ट्स में उल्लेख है कि महिला ने ई-मेल में आरोप लगाया है कि उत्तम स्वामी ने उसके साथ कई बार दुष्कर्म किया और नाबालिग रहते उसका यौन उत्पीड़न भी किया गया। साथ ही यह भी कहा गया है कि उत्तम स्वामी की राजनीतिक पहुंच होने के कारण उसे धमकियां दी जा रही हैं, साक्ष्य नष्ट किए जा सकते हैं तथा उसे और उसके परिवार को चुप रहने के लिए दबाव बनाया जा रहा है।मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नई दिल्ली में उत्तम स्वामी से जुड़े पल्लव नामक व्यक्ति द्वारा पीड़िता और उसके परिवार का पीछा किए जाने का मामला भी सामने आया है। हालांकि अब तक इस प्रकरण में दिल्ली पुलिस की ओर से प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है।
 
जबलपुर में कथा कार्यक्रम स्थगित

मीडिया में आई जानकारी के अनुसार, उत्तम स्वामी की जबलपुर के सहजपुर में श्रीमद्भागवत कथा चल रही थी, जिसे यौन शोषण संबंधी रिपोर्ट्स सामने आने के बाद स्थगित कर दिया गया है। साथ ही यह भी बताया जा रहा है कि उत्तम स्वामी अज्ञात स्थान पर चले गए हैं।
 
आश्रम की स्थापना और धार्मिक पदवी

उल्लेखनीय है कि उत्तम स्वामी ने बांसवाड़ा के जानामेड़ी गांव में अपना पहला आश्रम रविंद्र ध्यान आश्रम के नाम से स्थापित किया था। 22 जुलाई 2013 को गुरु पूर्णिमा के दिन उन्होंने स्वयं इसका उद्घाटन किया था। कुछ वर्षों बाद आश्रम का नाम उत्तम सेवा धाम रखा गया।बांसवाड़ा में आश्रम की स्थापना के बाद उनके अनुयायी उन्हें महर्षि और ध्यानयोगी भी कहने लगे। इसके बाद उन्होंने मध्यप्रदेश, उत्तराखंड और अन्य धार्मिक स्थलों पर भी आश्रम आरंभ किए। हरिद्वार महाकुंभ के दौरान 10 अप्रैल 2021 को सनातनी अखाड़ा परिषद के श्री पंच अग्नि अखाड़ा द्वारा उन्हें महामंडलेश्वर की पदवी से अलंकृत कर महामंडलेश्वर ईश्वरानंद महाराज की उपाधि दी गई। 2025 के प्रयागराज महाकुंभ में उन्हें श्री काशी विद्वत परिषद का संरक्षक बनाए जाने की भी जानकारी सामने आई है।