अंतरराज्यीय गिरोह पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई, नकली दवाओं का जखीरा पकड़ा
नई दिल्ली: राजधानी की क्राइम ब्रांच ने जनस्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए नकली जीवन रक्षक दवाओं के काले कारोबार को ध्वस्त कर दिया है। पुलिस की विशेष टीम ने इस कार्रवाई के दौरान गिरोह के मुख्य सरगना सहित चार आरोपियों को हिरासत में लिया है और मुखर्जी नगर में संचालित एक अवैध रीपैकेजिंग यूनिट का भंडाफोड़ किया है। इस छापेमारी में लगभग छह करोड़ रुपये मूल्य की नकली दवाएं और पैकेजिंग में प्रयुक्त होने वाली मशीनें जब्त की गई हैं, जो दिल्ली-एनसीआर से लेकर पूर्वोत्तर राज्यों तक सप्लाई की जा रही थीं।
सरकारी दवाओं की हेराफेरी और अवैध रीपैकेजिंग का खेल
इस संगठित नेटवर्क का संचालन बेहद शातिराना तरीके से किया जा रहा था जिसमें सरकारी अस्पतालों के लिए आरक्षित दवाओं को अवैध रूप से एकत्रित किया जाता था। गिरोह के सदस्य इन दवाओं से मूल सरकारी लेबल हटाकर उन पर नामी ब्रांडों के फर्जी लेबल लगा देते थे ताकि उन्हें खुले बाजार में ऊंचे दामों पर बेचा जा सके। मुखर्जी नगर स्थित एक गुप्त ठिकाने पर मशीनों के जरिए इन दवाओं की रीपैकेजिंग की जाती थी जहाँ से भारी मात्रा में हेपेटाइटिस, रेबीज वैक्सीन और इंसुलिन जैसी महत्वपूर्ण दवाओं के नकली संस्करण बरामद किए गए हैं।
अंतरराज्यीय नेटवर्क और आरोपियों की गिरफ्तारी का विवरण
क्राइम ब्रांच ने तकनीकी निगरानी और खुफिया सूचनाओं के आधार पर दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में दबिश देकर इस नेटवर्क के मुख्य कड़ियों को जोड़ा है। गिरफ्तार आरोपियों में दिल्ली का मुख्य संचालक मनोज कुमार जैन, पंचकूला से राजू कुमार तथा प्रयागराज से विक्रम सिंह और वतन शामिल हैं। जांच में सामने आया है कि ये आरोपी उत्तर प्रदेश के सरकारी अस्पतालों से दवाओं को अवैध तरीके से निकालकर दिल्ली लाते थे, जबकि कुछ आरोपी कोविड काल से ही इस अनैतिक व्यापार में सक्रिय थे और उन्होंने पंजाब के डेराबस्सी में भी नकली दवा निर्माण की इकाइयां स्थापित कर रखी थीं।
स्वास्थ्य सुरक्षा पर गंभीर खतरा और विस्तृत सप्लाई चेन
पुलिस की प्रारंभिक जांच में यह डरावना सच सामने आया है कि इस गिरोह की पहुंच दिल्ली-एनसीआर के अलावा कोलकाता, गुवाहाटी और इंफाल जैसे शहरों तक फैली हुई थी। स्नेक वेनम एंटीसीरम और ह्यूमन एल्ब्यूमिन जैसी जीवन रक्षक दवाओं के नकली होने से मरीजों की जान पर बड़ा जोखिम बना हुआ था। पुलिस को इस गिरोह के वित्तीय लेन-देन में हवाला के इस्तेमाल के संकेत भी मिले हैं और फिलहाल सभी आरोपी पुलिस रिमांड पर हैं ताकि इस सिंडिकेट से जुड़े अन्य लोगों और इनके संभावित अंतरराष्ट्रीय संपर्कों का पूरी तरह खुलासा किया जा सके।
