कोटपूतली (राजस्थान)। नगरीय निकाय चुनाव-2026 के अंतर्गत नाम वापसी की प्रक्रिया संपन्न होने के साथ ही कोटपूतली नगर परिषद की चुनावी बिसात पूरी तरह बिछ चुकी है। शहर के सभी 60 वार्डों में अब अंतिम रूप से कुल 428 उम्मीदवार चुनावी समर में ताल ठोक रहे हैं। नामांकन वापसी के अंतिम दिन गुरुवार को 138 प्रत्याशियों ने अपने पर्चे वापस लिए, जिसके बाद चुनावी तस्वीर साफ हो गई है। शुक्रवार को चुनाव चिह्नों के आवंटन के साथ ही शहर में सघन प्रचार अभियान गति पकड़ेगा।

नामांकन प्रक्रिया और छंटनी का गणित

नगर परिषद के 60 वार्डों के लिए नामांकन प्रक्रिया के दौरान कुल 666 प्रत्याशियों ने 834 नामांकन पत्र दाखिल किए थे। संवीक्षा (जांच) के दौरान विभिन्न तकनीकी कारणों से 186 नामांकन पत्र निरस्त किए गए, जबकि 648 पर्चे वैध पाए गए थे। छंटनी के बाद मैदान में 566 प्रत्याशी शेष थे। इसके पश्चात गुरुवार को नाम वापसी के अंतिम चरण में 138 उम्मीदवारों द्वारा चुनावी मैदान छोड़ने से अब मुकाबले में 428 प्रत्याशी ही डटे हैं।

वार्ड 34 और 35 में कड़ा मुकाबला, इस्तेमाल होंगी दो-दो ईवीएम

इस चुनाव में वार्ड संख्या 34 और 35 सबसे बड़े 'हॉट स्पॉट' के रूप में उभरे हैं। इन दोनों वार्डों में सर्वाधिक 17-17 प्रत्याशी मैदान में ताल ठोक रहे हैं। उम्मीदवारों की संख्या अधिक होने के कारण मतदान प्रक्रिया सुचारू रखने के लिए निर्वाचन विभाग को यहां दो-दो इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) लगानी होंगी। दोनों वार्डों में कड़े बहुकोणीय मुकाबले के चलते नतीजे बेहद दिलचस्प होने के आसार हैं।

कांग्रेस और भाजपा में बागियों ने बढ़ाई हलचल

प्रमुख राजनीतिक दलों की स्थिति देखें तो कांग्रेस के 57 और भाजपा के 54 अधिकृत उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं। कांग्रेस को दो वार्डों में बड़ा झटका लगा है; वार्ड संख्या 34 से कांग्रेस प्रत्याशी भगवान सहाय का नामांकन पत्र तकनीकी खामियों के चलते निरस्त हो गया, जबकि वार्ड संख्या 32 से कांग्रेस उम्मीदवार हंसा सैनी ने नाम वापस ले लिया।

इसके अतिरिक्त, कई वार्डों में कांग्रेस और भाजपा के अधिकृत प्रत्याशियों के सामने दोनों दलों के असंतुष्ट बागी कार्यकर्ता निर्दलीय के तौर पर ताल ठोक रहे हैं। बागियों और मजबूत निर्दलीयों की मौजूदगी ने मुख्य दलों के पारंपरिक समीकरणों को उलझा दिया है।

चुनाव चिह्न मिलते ही घर-घर पहुंचेगा प्रचार

निर्दलीय प्रत्याशियों को चुनाव चिह्न आवंटित होते ही प्रचार का विधिवत दौर शुरू हो जाएगा। शहर के चौक-चौराहों और मोहल्लों में बैठकों का सिलसिला पहले से जारी है, जो अब घर-घर सघन जनसंपर्क में बदलेगा। आने वाले दिनों में स्थानीय मुद्दे, व्यक्तिगत साख, जातीय संतुलन और बागी प्रत्याशियों की भूमिका जीत-हार तय करने में निर्णायक साबित होगी।