अस्पताल की लापरवाही पड़ी भारी, दो महिलाओं की मौत से मचा हड़कंप
कोटा: मेडिकल कॉलेज अस्पताल के स्त्री रोग विभाग में सिजेरियन ऑपरेशन के पश्चात आधा दर्जन प्रसूताओं की हालत बिगड़ने के गंभीर मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। इस दुखद घटनाक्रम में लापरवाही के कारण दो महिलाओं की जान जाने और अन्य की स्थिति नाजुक होने के बाद प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। सरकार के हस्तक्षेप के बाद चिकित्सा महाविद्यालय प्रशासन ने देर रात बड़ी कार्रवाई करते हुए दो चिकित्सकों और दो नर्सिंग कर्मियों को चिन्हित कर उनके विरुद्ध आदेश जारी किए हैं, जिससे पूरे चिकित्सा महकमे में हड़कंप मच गया है।
प्रशासन का सख्त रुख और दोषी कर्मचारियों पर गाज
इस पूरे प्रकरण में जवाबदेही तय करते हुए मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने सर्जरी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. नवनीत शर्मा और स्त्री रोग विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. श्रद्धा सहित ओटी व लेबर रूम की सिस्टर इंचार्ज के खिलाफ अनुशासनात्मक कदम उठाए हैं। इस कार्रवाई के तहत डॉक्टर श्रद्धा की सेवाओं को तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया गया है, जबकि अन्य कर्मियों पर भी विभागीय गाज गिरी है। हालांकि, अस्पताल की इस तत्परता पर अब यह सवालिया निशान लग रहे हैं कि यदि यह संजीदगी समय रहते दिखाई गई होती, तो शायद मृत प्रसूताओं को बचाया जा सकता था और अन्य महिलाओं को डायलिसिस जैसी गंभीर स्थिति तक नहीं पहुंचना पड़ता।
संक्रमण का प्रसार और महिलाओं की नाजुक स्थिति
अस्पताल के भीतर फैले संक्रमण या चिकित्सीय चूक का असर इतना घातक रहा है कि दो महिलाओं की मृत्यु के बाद भी संकट टला नहीं है। वर्तमान में तीन अन्य महिलाएं जीवन और मौत के बीच संघर्ष कर रही हैं, जिन्हें गुर्दे की विफलता के कारण डायलिसिस पर रखा गया है। संक्रमण का दायरा बढ़ता देख नया अस्पताल परिसर अब जांच के घेरे में है, क्योंकि सिजेरियन के बाद लगातार महिलाओं का यूरिन आउटपुट बंद होने और किडनी में गंभीर इंफेक्शन के मामले सामने आ रहे हैं, जिससे अस्पताल की स्वच्छता और ऑपरेशन थिएटर के मानकों पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं।
परिजनों के आक्रोश के बीच व्यवस्थाओं पर उठते सवाल
पीड़ित महिलाओं के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर बेहद संगीन आरोप लगाते हुए कहा है कि तबीयत बिगड़ने के बाद स्टाफ ने मामले को सुलझाने के बजाय उसे दबाने का प्रयास किया। एक प्रसूता के परिजनों के अनुसार, जब महिला की हालत पूरी तरह नियंत्रण से बाहर हो गई, तब अस्पताल प्रशासन ने अपनी जिम्मेदारी से हाथ खींच लिए, जिसके बाद मजबूरन मरीज को निजी अस्पताल ले जाना पड़ा। परिजनों का आरोप है कि सरकारी अस्पताल की इस घोर लापरवाही और सूचनाओं को छिपाने की प्रवृत्ति ने मरीजों की जान को जोखिम में डाल दिया है, जिसे लेकर अब न्याय की गुहार लगाई जा रही है।
