झालावाड़। स्थानीय कृषि उपज मंडी में इन दिनों पीले सोने यानी सोयाबीन की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखने को मिल रहा है, जिससे लंबे समय से आर्थिक तंगी झेल रहे किसानों के चेहरों पर रौनक लौट आई है। पिछले एक महीने के भीतर ही सोयाबीन के भाव छह हजार दो सौ रुपये प्रति क्विंटल से बढ़कर सात हजार दो सौ पचास रुपये प्रति क्विंटल के ऊंचे स्तर पर पहुंच गए हैं। शुक्रवार को भी बाजार में एक हजार रुपये से अधिक की तेजी दर्ज की गई, जिसने मंदी की मार झेल रहे काश्तकारों को एक बड़ी राहत प्रदान की है। हालांकि, जहां एक तरफ सोयाबीन उत्पादकों के लिए बाजार से अच्छी खबर आ रही है, वहीं दूसरी तरफ इसी जिले की बकानी मंडी में अव्यवस्थाओं के चलते गेहूं उत्पादक किसान बेहद परेशान नजर आ रहे हैं।

वैश्विक तनाव और मांग बढ़ने से सोयाबीन की कीमतों में आया भारी उछाल

मंडी के वरिष्ठ व्यापारियों और आर्थिक जानकारों का मानना है कि सोयाबीन के दामों में आई इस अचानक तेजी के पीछे अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां मुख्य रूप से जिम्मेदार हैं। ईरान, इराक और अमेरिका के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और युद्ध जैसे हालातों के कारण वैश्विक बाजार में डीओसी (डी-ओयल्ड केक) की मांग में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हुई है। इसके साथ ही, इस बार प्रतिकूल मौसम और अत्यधिक बारिश की वजह से खेतों में खड़ी फसल को भारी नुकसान पहुंचा था, जिसके चलते मंडियों में माल की आवक बेहद सीमित रह गई है और इसी कम आपूर्ति व उच्च मांग के समीकरण ने कीमतों को पांच हजार के पुराने स्तर से उठाकर सात हजार के पार पहुंचा दिया है।

लागत से कम दाम मिलने के बाद अब किसानों को दिखी मुनाफे की उम्मीद

बीते दो सालों का अनुभव किसानों के लिए बेहद निराशाजनक रहा था क्योंकि सोयाबीन के दाम लगातार लागत मूल्य से भी नीचे बने हुए थे, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर कर्ज और आर्थिक दबाव लगातार बढ़ रहा था। मंडी के अनुभवी व्यापारियों का कहना है कि करीब पांच साल पहले सोयाबीन ने दस हजार रुपये प्रति क्विंटल का ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाया था, जिसके बाद बाजार लगातार सुस्त पड़ा हुआ था। अब पांच वर्षों के लंबे इंतजार के बाद बाजार में आई इस मजबूती से किसानों में एक नई उम्मीद जगी है, हालांकि कई किसानों का यह भी कहना है कि इस बार पैदावार बेहद कम होने के कारण उन्हें इस बढ़ी हुई कीमत का वह पूरा फायदा नहीं मिल पा रहा है जिसकी वे उम्मीद कर रहे थे।

बकानी मंडी में बारदाने का संकट और भीषण गर्मी में ठप पड़ी गेहूं की तुलाई

सोयाबीन की इस तेजी के बीच जिले की बकानी कृषि उपज मंडी से एक बेहद परेशान करने वाली तस्वीर सामने आई है, जहां पिछले तीन दिनों से गेहूं की सरकारी खरीद और तुलाई का काम पूरी तरह से ठप पड़ा हुआ है। प्रांतीय मुख्यालय जयपुर से किसानों के मोबाइल पर समर्थन मूल्य पर फसल बेचने के डिजिटल मैसेज तो लगातार भेजे जा रहे हैं, लेकिन जब किसान अपना गेहूं लेकर राजफेड तुलाई केंद्र पर पहुंच रहे हैं, तो वहां बोरियां (बारदाना) खत्म होने की बात कहकर उन्हें लौटाया जा रहा है। इस चिलचिलाती और भीषण गर्मी के मौसम में किसान अपनी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में अनाज भरकर सुबह से देर रात तक केंद्रों पर भूखे-प्यासे बैठने को विवश हैं या फिर अपनी फसल वापस घर ले जाने पर मजबूर हैं।

सहकारी समितियों की लाचारी और वेयरहाउस में लगा अनाज का भारी अंबार

क्रय-विक्रय सहकारी समिति के स्थानीय कर्मचारियों ने इस अव्यवस्था पर अपनी लाचारी व्यक्त करते हुए स्पष्ट किया है कि उच्च स्तर पर बारदाने की कमी की सूचना बहुत पहले ही भिजवाई जा चुकी है और नई बोरियां आने के बाद ही तुलाई का काम दोबारा शुरू किया जा सकेगा। अब तक राजफैड और तिलम संघ के माध्यम से हजारों किसानों की एक लाख से अधिक बोरियों की तुलाई तो की जा चुकी है, लेकिन वर्तमान में वेयरहाउस के प्लेटफार्म पर गेहूं का भारी अंबार लगा हुआ है और गाड़ियां खाली होने में दो से तीन दिन का लंबा वक्त लग रहा है। इस प्रशासनिक सुस्ती और तालमेल की कमी के कारण दूर-दराज के गांवों से आए किसान रोजाना केंद्र के चक्कर काटने को मजबूर हैं।