लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के कामकाज के तरीके पर कड़ा रुख अख्तियार किया है। उन्होंने साफ लहजे में कहा कि विभाग की खामियों या ठेकेदारों की ढिलाई की जिम्मेदारी जनप्रतिनिधियों के सिर नहीं मढ़ी जा सकती। सरकारी परियोजनाओं की क्वालिटी और उन्हें तय समयसीमा के भीतर पूरा कराना पूरी तरह से विभागीय अधिकारियों की जिम्मेदारी है।

मुख्यमंत्री ने बुधवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए लोक निर्माण विभाग की वर्ष 2026-27 की कार्ययोजना की उच्च स्तरीय समीक्षा की। इस बैठक में प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों (डीएम), मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। सीएम ने सख्त हिदायत दी कि विकास कार्यों के मानकों और गुणवत्ता में किसी भी तरह का ढुलमुल रवैया बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

एक हफ्ते में मांगे स्थानीय प्रस्ताव, मनमर्जी नहीं चलेगी

मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया कि वे स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ बैठकर अपने-अपने जिलों की आवश्यकताओं के अनुसार विकास योजनाओं का खाका तैयार करें और एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट शासन को भेजें। जून के पहले हफ्ते में इन योजनाओं को हरी झंडी दे दी जाएगी। सीएम ने स्पष्ट कहा कि प्रोजेक्ट्स के चयन में अधिकारियों की अपनी पसंद-नापसंद (पिक एंड चूज) वाली आदत पर तुरंत रोक लगनी चाहिए। हर प्रोजेक्ट के लिए एक नोडल अफसर तय हो और पीडब्ल्यूडी की टीमें हर जिले में जाकर जमीनी स्तर पर कार्यों की जांच करें।

बैठक के दौरान पीडब्ल्यूडी के प्रमुख सचिव अजय चौहान ने बताया कि नए वित्त वर्ष (2026-27) के लिए अब तक 30 हजार से ज्यादा विकास प्रस्ताव मिल चुके हैं। इस समीक्षा बैठक में केंद्रीय राज्यमंत्री एसपी सिंह बघेल, प्रदेश के वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री अरुण कुमार सक्सेना और पीडब्ल्यूडी राज्यमंत्री ब्रजेश सिंह भी मुख्य रूप से मौजूद रहे।

आपातकालीन सेवाओं के लिए हर ब्लॉक में बनेंगे हेलीपैड

बैठक में सीएम योगी ने एक बड़ा फैसला लेते हुए निर्देश दिया कि राज्य के प्रत्येक ब्लॉक, तहसील और जिला मुख्यालय के पास हेलीपैड का निर्माण कराया जाए, ताकि इमरजेंसी सेवाओं में तेजी आ सके। इन हेलीपैड्स की देखरेख और मेंटेनेंस का जिम्मा पीडब्ल्यूडी संभालेगा और इनके व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए शुल्क भी तय किया जाएगा।

तारकोल की जगह सीसी रोड पर फोकस, नई तकनीक अपनाने पर जोर

ईंधन और बिटुमिन (तारकोल) की कमी और बढ़ती कीमतों को देखते हुए मुख्यमंत्री ने विभाग को तकनीकी बदलाव करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि:

  • ग्रामीण क्षेत्रों में दो किलोमीटर तक की सभी सड़कों को अब तारकोल की जगह सीसी रोड (सीमेंट कंक्रीट) से बनाया जाए।

  • बिटुमिन की खपत घटाने के लिए 'सीमेंट ट्रीटेड बेस' तकनीक को प्राथमिकता दी जाए।

  • 'सीएम ग्रिड योजना' के तहत शहरों और कॉलोनियों की आंतरिक सड़कों को मजबूत करने के काम में और तेजी लाई जाए।