छत्तीसगढ़ में 'व्यापमं' का दौर खत्म: अब कर्मचारी चयन मंडल संभालेगा कमान

रायपुर| तृतीय और चतुर्थ श्रेणी की भर्तियों पर रहेगा फोकस नया गठित मंडल अब राज्य सरकार के सभी विभागों के अंतर्गत आने वाले तृतीय (Group C) और चतुर्थ (Group D) श्रेणी के पदों पर सीधी भर्ती की प्रक्रिया को संपन्न कराएगा। इसके कार्यक्षेत्र में न केवल सरकारी विभाग, बल्कि विभिन्न वैधानिक निकाय, मंडल, प्राधिकरण और अन्य सरकारी संस्थान भी शामिल होंगे। इसके अलावा, राज्य के प्रमुख व्यावसायिक पाठ्यक्रमों (जैसे- पीईटी, पीएमटी आदि) की प्रवेश परीक्षाएं आयोजित करने का दायित्व भी इसी मंडल के पास होगा।

पारदर्शिता और कड़े नियम: नकलचियों की खैर नहीं इस नई व्यवस्था की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सख्त नियमावली है। अधिनियम में 'मंडल निधि' का विशेष प्रावधान किया गया है, जिसका प्रतिवर्ष ऑडिट अनिवार्य होगा ताकि वित्तीय पारदर्शिता बनी रहे। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यदि कोई अभ्यर्थी परीक्षा में अनुचित साधनों (नकल) का प्रयोग करता है या परीक्षा के दौरान किसी भी प्रकार का व्यवधान उत्पन्न करता है, तो मंडल को उसके खिलाफ कठोर कानूनी दंडात्मक कार्रवाई करने का सीधा अधिकार दिया गया है।

मंडल की संरचना और संचालन इस उच्च स्तरीय मंडल का नेतृत्व एक अध्यक्ष करेंगे, जिनकी सहायता के लिए अधिकतम तीन सदस्य नियुक्त किए जाएंगे। प्रशासनिक कार्यों के लिए सचिव, परीक्षा नियंत्रक और अन्य अधिकारियों की टीम तैनात होगी। खास बात यह है कि व्यापमं के वर्तमान अधिकारी और कर्मचारी भी अब इसी नए मंडल का हिस्सा माने जाएंगे। मंडल को सुचारू रूप से चलाने के लिए वित्त, पाठ्यक्रम और परीक्षा समितियों का अलग से गठन किया जाएगा।

क्या बदलेगा आपके लिए? 

  • पुरानी भर्तियां: जिन परीक्षाओं के विज्ञापन इस नए अधिनियम के लागू होने से पहले जारी हो चुके हैं, वे पुरानी प्रक्रिया के तहत ही संपन्न होंगी।

  • सख्ती: परीक्षा में गड़बड़ी करने वालों पर अब सीधे कानूनी केस दर्ज होगा।

  • एजेंसी चयन: मंडल के पास यह अधिकार होगा कि वह चयन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए किसी विश्वसनीय बाहरी एजेंसी को भी जिम्मेदारी सौंप सके।