पुरातत्वविदों के लिए बड़ी खोज, इतिहास में जुड़ा नया अध्याय
मल्हार में ऐतिहासिक खोज: 2000 साल पुराना दुर्लभ ताम्रपत्र बरामद, प्राचीन भारत के खुलेंगे कई गहरे राज
बिलासपुर: छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक नगरी मल्हार एक बार फिर अपनी प्राचीन विरासत को लेकर वैश्विक चर्चा के केंद्र में है। पुरातात्विक अन्वेषण के दौरान शोधकर्ताओं को यहाँ से लगभग 2000 वर्ष प्राचीन एक विशाल ताम्रपत्र (कॉपर प्लेट) प्राप्त हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह खोज न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि दक्षिण-पूर्व एशिया के प्राचीन व्यापारिक और सांस्कृतिक इतिहास को समझने में मील का पत्थर साबित हो सकती है।
‘ज्ञान भारतम’ अभियान को मिली ऐतिहासिक संजीवनी
यह दुर्लभ उपलब्धि ‘ज्ञान भारतम’ अभियान के अंतर्गत हासिल की गई है। इस राष्ट्रव्यापी अभियान का मुख्य लक्ष्य विलुप्त होती भारतीय सांस्कृतिक धरोहरों को खोजना, उनका वैज्ञानिक संरक्षण करना और वैश्विक पटल पर उन्हें स्थापित करना है। मल्हार से मिले इस साक्ष्य ने प्राचीन भारतीय इतिहास के अनुसंधान को एक नई दिशा प्रदान की है।
विशालकाय आकार और असाधारण वजन
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असाधारण वजन: शोधकर्ताओं के अनुसार, इस प्लेट का वजन 3 किलोग्राम से अधिक है।
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महत्व: आमतौर पर प्राचीन काल के ताम्रपत्र छोटे और हल्के होते थे, लेकिन इतना भारी ताम्रपत्र यह स्पष्ट संकेत देता है कि यह किसी अत्यंत प्रभावशाली सम्राट का राजकीय आदेश (Royal Decree) या किसी विशाल भू-भाग के दान का आधिकारिक दस्तावेज है।
प्राचीन लिपि और भाषा का संगम
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ब्राह्मी लिपि: इस पर भारतीय उपमहाद्वीप की जननी मानी जाने वाली ब्राह्मी लिपि का प्रयोग किया गया है।
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पाली भाषा: लेख की भाषा पाली है, जो मौर्य और उत्तर-मौर्य काल में धर्म और शासन की प्रमुख भाषा हुआ करती थी।
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धार्मिक जुड़ाव: चूंकि पाली भाषा का सीधा संबंध बौद्ध धम्म से है, इसलिए इस बात की प्रबल संभावना है कि यह ताम्रपत्र किसी बौद्ध विहार या चैत्य के निर्माण अथवा संरक्षण से संबंधित हो सकता है।
राजकीय व्यवस्था और भूमि दान का प्रमाण
इतिहासकारों के अनुसार, प्राचीन भारत में राजा अपने विजय अभियानों, धार्मिक अनुष्ठानों या भूमि अनुदानों को चिरस्थायी बनाने के लिए धातुओं पर उत्कीर्ण करवाते थे। इस ताम्रपत्र के विश्लेषण से उस समय की:
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प्रशासनिक व्यवस्था: कर प्रणाली और राजकीय सीमाओं की जानकारी मिल सकती है।
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सामाजिक ढांचा: तात्कालिक समाज में दान की परंपरा और ब्राह्मणों या बौद्ध भिक्षुओं की स्थिति का पता चलेगा।
वैज्ञानिक विश्लेषण और आगामी कदम
वर्तमान में इस ताम्रपत्र को विशेष सुरक्षा में रखा गया है। जल्द ही इसे कार्बन डेटिंग (C-14) और परिष्कृत रासायनिक विश्लेषण के लिए प्रयोगशाला भेजा जाएगा। लिपि विशेषज्ञों की एक टीम इस पर लिखे गए एक-एक शब्द का अनुवाद करने में जुटी है। विशेषज्ञों को उम्मीद है कि इस अनुवाद के बाद किसी गुमनाम महान राजा या उस समय के किसी बड़े ऐतिहासिक घटनाक्रम का खुलासा हो सकता है।
मल्हार का बढ़ता गौरव: इस खोज के बाद मल्हार की पहचान एक प्राचीन महानगरी और व्यापारिक केंद्र के रूप में और भी पुख्ता हो गई है। यह स्थान अब शोधार्थियों और पर्यटकों के लिए और भी आकर्षण का केंद्र बनेगा।
