यमुना प्रदूषण पर कड़ा वार, अवैध जींस फैक्टरी पर लगा ₹10 लाख का जुर्माना
नई दिल्ली। यमुना नदी को प्रदूषित करने वाले अवैध उद्योगों के खिलाफ दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) ने अपना रुख बेहद कड़ा कर लिया है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में पेश की गई अपनी नवीनतम रिपोर्ट में समिति ने स्पष्ट किया है कि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली किसी भी औद्योगिक इकाई के प्रति कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी। इसी कड़ी में समिति ने उत्तर-पूर्वी दिल्ली के गढ़ी मांडू गांव में संचालित हो रही एक अवैध जींस डाइंग और वाशिंग यूनिट पर लगाए गए 10 लाख रुपये के पर्यावरण मुआवजे को पूरी तरह से वैधानिक और तर्कसंगत ठहराया है, जिससे अवैध रूप से चल रहे अन्य कारोबारियों में हड़कंप मच गया है।
सोशल मीडिया की शिकायत पर संयुक्त छापेमारी
यह पूरा मामला सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर वरुण गुलाटी नामक व्यक्ति द्वारा की गई एक शिकायत के बाद प्रकाश में आया था। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए डीपीसीसी, एमसीडी, दिल्ली पुलिस और संबंधित विभागों की एक संयुक्त टीम ने चिन्हित स्थान पर औचक छापेमारी की। इस जांच के दौरान यह पाया गया कि बिना किसी वैध प्रशासनिक अनुमति और प्रदूषण नियंत्रण संबंधी मंजूरी के बड़े पैमाने पर जींस की रंगाई और धुलाई का काम धड़ल्ले से किया जा रहा था।
बिना ट्रीटमेंट के यमुना में बह रहा था जहरीला पानी
निरीक्षण दल को जांच में पता चला कि इस अवैध कारखाने से निकलने वाला अत्यधिक रासायनिक और जहरीला पानी बिना किसी एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ईटीपी) के सीधे सार्वजनिक नालों में बहाया जा रहा था। यह प्रदूषित और केमिकल युक्त पानी अंततः यमुना नदी में मिलकर उसके जल को गंभीर रूप से दूषित कर रहा था। डीपीसीसी ने इस प्रकार के रसायनों को पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक और 'रेड कैटेगरी' का प्रदूषण मानते हुए ही इस इकाई पर भारी जुर्माना लगाया है।
भू-राजस्व की तर्ज पर होगी जुर्माने की वसूली
डीपीसीसी ने अदालत को सूचित किया है कि बार-बार निर्देश देने के बावजूद जब यूनिट संचालक द्वारा जुर्माने की राशि जमा नहीं की गई, तो प्रशासन ने सख्त रुख अख्तियार किया। इसके तहत करावल नगर के एसडीएम को निर्देश जारी किए गए हैं कि वे इस 10 लाख रुपये के मुआवजे की वसूली भू-राजस्व के बकाए की तरह सख्ती से करें। विभाग द्वारा इस संबंध में संबंधित अधिकारियों को त्वरित कार्रवाई के लिए दोबारा रिमाइंडर भी भेजा जा चुका है।
कार्रवाई के दावों के बीच जमीनी हकीकत की चुनौती
इस कड़ी कार्रवाई के बावजूद जमीनी हकीकत अब भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है, क्योंकि दिल्ली के विभिन्न हिस्सों में वर्तमान में भी करीब 500 अवैध जींस डाइंग इकाइयां धड़ल्ले से संचालित हो रही हैं। इनमें से अधिकांश इकाइयों पर न तो अब तक कोई जुर्माना लगाया गया है और न ही उन्हें सील करने की कोई ठोस कार्रवाई हुई है। रिहायशी और नॉन-कन्फर्मिंग इलाकों में इन अवैध फैक्ट्रियों से लगातार फैल रहे प्रदूषण को रोकने के लिए अधिक व्यापक और प्रभावी अभियानों की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
