‘गद्दारी की राजनीति’ पर वार, शिंदे को लेकर सियासी विवाद तेज
मुंबई। महाराष्ट्र की सियासत में पल-पल बदलते घटनाक्रमों के बीच महाविकास अघाड़ी (MVA) के भीतर वैचारिक मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के वरिष्ठ नेता और सांसद संजय राउत ने एक बार फिर अपने तीखे बयानों से राज्य के राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। राउत ने कड़े लहजे में कहा कि 'विश्वासघात' करने वालों को किसी भी स्तर पर सम्मान देना जमीन पर काम करने वाले निष्ठावान कार्यकर्ताओं के मनोबल को तोड़ने जैसा है।
पीठ में छुरा घोंपने वालों का सम्मान मंजूर नहीं: संजय राउत
सांसद संजय राउत ने गठबंधन की आंतरिक स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा, "हमारी नाराजगी कल जरूर थी, लेकिन आज हम नाराज नहीं हैं। शरद पवार साहब हमारे और महाविकास आघाड़ी के सर्वोच्च नेता हैं। हमने केवल अपनी स्वाभाविक भावनाएं साझा की थीं। हमारा रुख साफ है कि एकनाथ शिंदे सबसे बड़े गद्दार हैं। जब अजित पवार ने बगावत कर शरद पवार साहब की पार्टी को विभाजित किया था, तब हमें भी वैसी ही गहरी पीड़ा हुई थी।"
उन्होंने वरिष्ठ नेतृत्व के रुख पर सवालिया निशान लगाते हुए आगे कहा कि जो लोग धोखा देते हैं, उन्हें हमारे जैसे राजनीतिक नेताओं द्वारा किसी भी कीमत पर तवज्जो नहीं मिलनी चाहिए। यदि ऐसा होने लगा, तो भविष्य में कोई भी आसानी से विश्वासघात करेगा और फिर हमारे ही वरिष्ठ नेता उनके घर जाकर चाय-पानी पिएंगे। ऐसी स्थिति में पार्टी के वफादार कार्यकर्ताओं के बीच बेहद गलत संदेश जाता है।
शरद पवार और एकनाथ शिंदे की मुलाकात से बढ़ा सियासी पारा
संजय राउत की यह तल्ख टिप्पणी उस पृष्ठभूमि में आई है, जब राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के प्रमुख शरद पवार ने अचानक मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से मुलाकात की थी। इस बैठक के बाद से ही महाराष्ट्र की राजनीति में अटकलों का बाजार बेहद गर्म है। यह मुलाकात ऐसे संवेदनशील समय पर हुई है जब शरद पवार की पार्टी के आगामी रुख और राजनीतिक निर्णयों को लेकर पहले से ही तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।
एनसीपी (शरद पवार) के विलय की सुगबुगाहट तेज
महाराष्ट्र के राजनीतिक हलकों में इन दिनों शरद पवार की पार्टी के किसी अन्य दल में विलय को लेकर चर्चाएं जोरों पर हैं। हाल ही में शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट में शामिल होने के बाद से यह संभावना और प्रबल मानी जा रही है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि एनसीपी (एसपी) का विलय या तो कांग्रेस में हो सकता है या फिर वे एनडीए (NDA) का हिस्सा बन सकते हैं। इन चर्चाओं के पीछे यह तर्क भी दिया जा रहा है कि केंद्र सरकार सदन में दो-तिहाई बहुमत जुटाने की कवायद में है, जिससे क्षेत्रीय दलों के समीकरण तेजी से बदल रहे हैं।
